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Volume 1 Issue 1 April 2026

Article Title : मुंशी प्रेमचंद: यथार्थवाद और संवेदनशील कथाकार

Author Name : रजनीश कुमार

Author Type : single

Author Designation : शोधार्थी

Institute : स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग


Abstract

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे महान कथाकार हैं, जिन्होंने भारतीय समाज के यथार्थ को अपनी रचनाओं में न केवल सजीव रूप में प्रस्तुत किया, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण, जातीय भेदभाव, स्त्री-विमर्श और ग्रामीण जीवन की पीड़ाओं को भी संवेदनशीलता से उजागर किया। प्रेमचंद के उपन्यास और कहानियाँ एक ओर जहाँ सामाजिक संरचनाओं की विद्रूपताओं को उजागर करती हैं, वहीं दूसरी ओर मानवीय मूल्यों, करुणा और नैतिक संघर्षों की प्रस्तुति के माध्यम से सुधार की प्रेरणा भी देती हैं। प्रेमचंद का यथार्थवाद केवल घटनाओं का चित्रण नहीं, बल्कि उस सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और नैतिक चेतना का प्रतिनिधित्व है, जो तत्कालीन भारतीय समाज के भीतर सघन रूप से व्याप्त थी। उन्होंने दलितों, स्त्रियों, किसानों और श्रमिक वर्ग के माध्यम से भारतीय समाज की परतों को उजागर किया और अपने पात्रों को जीवंत, संघर्षशील तथा संवेदनशील बनाया। यह शोधपत्र प्रेमचंद की प्रमुख रचनाओं — जैसे गोदान, सेवासदन, निर्मला, सद्गति, आदि — के माध्यम से उनके यथार्थवादी दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना का विश्लेषण करता है। साथ ही यह अध्ययन प्रेमचंद को भारतीय साहित्य में सामाजिक यथार्थवाद का प्रवर्तक सिद्ध करता है, जिनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं।


Keywords: मुंशी प्रेमचंद,,यथार्थवाद,सामाजिक चेतना,ग्रामीण जीवन,दलित चेतना,शोषण,नैतिक संघर्ष,हिंदी साहित्य।


Author Biography

रजनीश कुमार
शोधार्थी, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर, बिहार


References

1. तुलसीराम – मणिकर्णिका: नारी विमर्श के संदर्भ में 2. रामचंद्र शुक्ल – हिंदी साहित्य का इतिहास 3. प्रेमचंद, मुंशी. सद्गति. (प्रथम प्रकाशन: 1931) 4. सिंह, रमेश. प्रेमचंद की सामाजिक दृष्टि. दिल्ली: साहित्य भवन, 2005 5. वाल्मीकि, ओमप्रकाश. जूठन. राधाकृष्ण प्रकाशन, 1997 6. मिश्रा, हरिशंकर. हिंदी कहानी और यथार्थवाद. वाणी प्रकाशन, दिल्ली 2010. 7. आलोक राय. Premchand and the Discourses of Progressivism. Delhi: Oxford University Press, 2002 8. प्रेमचंद, मुंशी. मानसरोवर भाग-4, पृष्ठ: 12-17 9. द्विवेदी, रामविलास. हिंदी साहित्य का इतिहास, नागरी प्रचारिणी सभा 10. मिश्रा, हरिशंकर परसाई. साहित्य और समाज, राजकमल प्रकाशन,दिल्ली 11. पांडेय, रामचंद्र. प्रेमचंद और भारतीय कृषक चेतना, वाणी प्रकाशन,दिल्ली 12. प्रेमचंद, मुंशी. ईदगाह, संग्रह: मानसरोवर भाग-1 13. शुक्ल, नामवर. कहानी: विचार और रूप, राजकमल प्रकाशन,दिल्ली 14. पांडेय, रामचंद्र. प्रेमचंद और सामाजिक यथार्थ, वाणी प्रकाशन, दिल्ली 15. गौतम, लक्ष्मीनारायण. बाल-साहित्य और बाल-मनोविज्ञान, प्रकाशन विभाग 16. https://www.hindisamay.com – प्रेमचंद की कहानियाँ और लेख.

📄 Plagiarism PDF 📄 Paper File 📄 Certificate File

DOI URL: http://doi.org/10.5281/zenodo.20297614

DOI Number: 10.5281/zenodo.20297614

Publish Date 2026-06-05

How to Cite

Issue Volume 1 Issue 1 April 2026

Section Research Articles

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.

How to Cite मुंशी प्रेमचंद: यथार्थवाद और संवेदनशील कथाकार
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